परिवहन विभाग, यानि
सरकार के संरक्षण में भ्रष्टाचार
अवैध कमाई को लेकर दो अफसरों में खींचतान शुरू
आयकर विभाग कर सकता है बड़ी कार्यवाही
प्रशासनिक संवाददाता
भोपाल। मध्यप्रदेश में एक सरकारी विभाग ऐसा भी है जिसमें सरकार के संरक्षण में ही भ्रष्टाचार होता है। स्वयं सरकार ने सभी जांच एजेंसियों को इस विभाग के भ्रष्टाचार की ओर मुंह उठाकर भी न देखने को कह दिया है। राज्य के परिवहन विभाग में चोरी छिपे नहीं डंके की चोट पर सरेआम भ्रष्टाचार किया जाता है, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं जो इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मुंह खोल सके। मप्र में परिवहन विभाग के चेकपेास्टों पर खुलेआम होने वाले भ्रष्टाचार इस सीमा तक पहुंच गया है कि चेकपोस्टों पर सरकारी आय से ढाई गुना राशि भ्रष्टाचार के रास्ते आ रही है। यह पैसा मंत्री से लेकर अफसरों तक में बंटा जाता है।
मप्र परिवहन विभाग का भाग्य अच्छा है कि उसे तीन महिने बाद आयुक्त के रुप में एसएस लाल नसीब हो गए हैं। लाल साहब ने इस कुर्सी तक पहुंचने के लिए कितने पापड़ बेले, यह तो वे ही जानते हैं। लेकिन आखिर लाल साहब इस कुर्सी पर क्यों आना चाहते थे तथा इस विभाग के उपायुक्त ने अपने प्रभाव का उपयोग करके तीन महिने तक इस कुर्सी को खाली क्यों रखा? यह रोचक किस्सा है। पहले इतना जान लीजिए कि आयुक्त की नियुक्ति के बाद भी इस महकमे में उपायुक्त की ही चल रही है। फिलहाल आयकर विभाग के निशाने परिवहन विभाग के कई अधिकारी हैं। कोई बड़ी बात नहीं है कि आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी की तरह अगले कुछ दिनों में परिवहन विभाग राज्य सरकार के लिए नया सिरदर्द बन जाए। सूत्रों के अनुसार विभाग के दो अफसरों में हर महिने आने वाली लगभग बीस करोड़ रुपए की कमाई के हिस्से को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
मप्र परिवहन विभाग के लगभग चालीस चेकपोस्ट हैं। पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार परिवहन विभाग की कुल 831 करोड़ रुपए की आय में 91 करोड़ रुपए चेकपोस्टों से आए थे। विभाग के सूत्रों के अनुसार बीते वर्ष इन चेकपोस्टों से 200 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई की गई थी। अकेल नयागांव बैरियर से प्रतिमाह तीन करोड़ रुपए ऊपर बसूले जा रहे हैं, जो कायदे से सरकारी खाते में जमा होना चाहिए। इनके अलावा शाहपुरफाटा, मुल्ताई, खबासा, सोयत एवं खिलचीपुर बैरियरों से भी जमकर चांदी काटी जा रही है। इन बैरियरों से गुजरने वाले ट्रक 9 टन के स्थान पर 12 से 14 टन तक माल भरकर धडल्ले से निकल रहे हैं। खास बात यह है कि परिवहन विभाग के आधे से ज्यादा सिपाही एवं हवलदारों की नियुक्ति इन पांच बैरियरों पर कर दी गई है।
सेंधवा पर कमाई बंद : मप्र में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला बैरियर सेंधवा है जहां से राज्य सरकार को हर साल लगभग 25 करोड़ रुपए साल की आय होती है वहां पर्याप्त स्टाफ नहीं है, क्योंकि सेंधवा बैरियर पर इलेक्टॉनिक तौलकांटा लग जाने के कारण वहां अवैध कमाई पूरी तरह बंद है। परिवहन विभाग ने नयागांव व अन्य मलाईदार बैरियरों पर नियुक्त सिपाही हवलदारों को क्रम से सेंधवा पर छह माह में से एक माह नौकरी करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के यह सिपाही एवं हवलदार हर छह महिने में मोटी रकम
देकर मलाईदार बैरियरों पर नियुक्ति कराते हैं। इन्हें मजबूरी में छह में से एक माह सेंधवा जाना पड़ता है जहां ऊपर की कमाई नहीं होती। लेकिन विभाग के अधिकारियों के पासव इसव बात कर जबाव नहीं है कि अन्य बैरियरों की तरह सेंधवा बैरियर जहां से सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है, वहां सिपाही हवलदारों की सीधी नियुक्ति क्यों नहीं की जाती?
कमाई को विवाद शुरू : बताया जाता है कि परिवहन विभाग में बैरियरों से आने वाली अवैध कमाई में हिस्सें को लेकर दो अधिकारियों में विवाद शुरू हो गया है। परिवहन विभाग के तत्कालीन आयुक्त एनके त्रिपाठी के समय से ही विभाग के उपायुक्त ने अपनी चालाकी से बंटवारे में अपना हिस्सा बढ़ा लिया था। इस अधिकारी ने अपने खास संबंधों के आधार पर आयुक्त की कुर्सी को तीन महिने तक खाली रखवाने में भी सफलता पा ली थी, इस दौरान उन्होंने न केवल हर तीन महने में होने वाले रोटेशन को किया, बल्कि कुछ अधिकारियों की डीपीसी करके पदोन्नति भी कर डाली।
मंत्री व प्रमुखसचिव दूर : शायद किसी को विश्वारस न हो, लेकिन विभाग के सूत्रों का दावा है कि परिवहन विभाग की अवैध कमाई के बारे में अभी भी विभाग के प्रमुखसचिव राजन कटोच एवं मंत्री जगदीश देवडा को सही सही जानकारी नहीं है। मंत्री देवडा सरकार को चलाने वाली अदृश्य शक्तियों के इशारे पर काम करने को मजबूर हैं। विभाग में मंत्री से चांदी उनके निजी स्टाफ में पदस्थ अफसर काट रहे हैं। जबकि प्रमुख सचिव कटोच एकदम ईमानदार अफसर है। उनके सामने किसी की हिम्मत नहीं होती कि - चेकपोस्टों के बारे में चर्चा भी कर सकें।
लोकायुक्त में भी पहुंचता है हिस्सा : यह भी चौंकाने वाला तथ्य है कि मप्र में ईमानदार लोकायुक्त होने के बाद भी चेकपोस्टों से लोकायुक्त कार्यालय के कइ्र अधिकारियों ने महिना बांध रखा है। यहीं कारण है कि पिछले चार साल में लोकायुकत संगठन ने अभी तक मप्र के किसी चेकपोस्ट पर न तो छापा मारा है और न ही इस खुली लूट को लेकर कोई सख्त कार्रवाही की है। मजेदार बात यह है कि लगभग हर चेकपोस्ट पर चौबीस घंटे सड़क पर लूटपाट चलती रहती है, लेकिन लोकायुक्त संगठन सहित किसी एजेंसी की इस पर नजर क्यों नहीं पड़ती?
क्या हैं कटर : लगभग हर चेकपोस्ट पर कुछ कटर रखे जाते हैं जो अवैध कमाई को रखते हैं। यह एक तरह से प्राईवेट स्टाफ रहता है जो यदि किसी कारण से चेकपोस्ट पर छापा पड़ जाए तो यह बताया जा सके कि नगद रकम प्राइवेट आदमी के पास से बरामद हुई है। यह कटर कई वर्षों से बैरियरों पर जमे हुए हैं। अवैध कमाई के हिसाब की डायरी कटर ही मेंटेन करता है। कई जिलों में कलेक्टर, एसपी, सांसद, विधायक व स्थानीय नेताओं को भी हिस्सा पहुंचाने का काम कटर ही करते हैं।
तीन बसें जप्त, यात्री हुए पेरशान
परिवहन विभाग के विशेष जांच दल ने बुधवार को भोपाल में बड़ी कार्यवाही करते हुए इंदौर-भोपाल रोड़ पर तीन बसों को बिना परमिट के सवारियों को ढोते हुए पकड़ा। तीनों बसों को जप्त कर लिया
गया है। सूत्रों के अनुसार परिवहन आयुक्त एसएस लाल ने विशेष जांच दल को इंदौर भोपाल रोड़ पर अवैध बसों को पकडऩे के निर्देश दिए थे। दल के निरीक्षक संजय तिवारी ने फंदा के पास अचानक चैकिंग करके भोपाल से इंदौर जा रही तीन बसों को पकड़ा। इनमें एक बस पूर्व मंत्री प्रकाश सोनकर के रिश्तेदार की थी। बसें जप्त होने के कारण इनमें यात्रा कर रही सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तीनों बसों को खजूरी सड़क थाने में रखा गया है।
बुधवार, मार्च 03, 2010
रविवार, फ़रवरी 21, 2010
लोकायुक्त संगठन में यह कैसा जातिवाद !
दलित व आदिवासी नेताओं पर होती है कार्यवाही
प्रभावशाली बच जाते हैं
रवीन्द्र जैन
भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले छह वर्षों का लोकायुक्त संगठन का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। इस कार्यकाल में लोकायुक्त ने प्रदेश के जिन दो मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों के खिलाफ चालान पेश किया उनमें एक आदिवासी तथा एक दलित वर्ग का है। जबकि राज्य के कई प्रभावशाली मंत्रियों के खिलाफ जितनी भी शिकायतें लोकायुक्त संगठन में की गईं उन्हें या तो जांच के नाम से लंबित रखा गया अथवा क्लीन चिट दे दी गई है।
लोकायुक्त संगठन ने सूचना के अधिकार के तहत 10 जुलाई 2007 को बताया था कि लोकायुक्त संगठन में प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित 13 मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। इनमें से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जुगलकिशोर बागरी एवं ओमप्रकाश धुर्वे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत आपराधिक प्रकरण कायम किया गया है। जबकि अजय विश्रोई, बाबूलाल गौर, लक्ष्मीकांत शर्मा, जयंत मलैया, हिम्मत कोठारी, चौधरी चन्द्रभान सिंह, कमल पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, अनूप मिश्रा, मोती कश्यप के खिलाफ शिकायतों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त संगठन ने दलित गर्व के जुगल किशोर बागरी को रीवा में शिक्षाकर्मी चयन समिति के सदस्य के रूप में गलत नियुक्तियों का आरोप लगाकर उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। चालान पेश होने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बागीरी से त्यागपत्र मांग लिया।
ओमप्रकाश धुर्वे : इसी प्रकार ओमप्रकाश धुर्वें जब प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री थे तब राज्य सरकार ने उन्हें मप्र नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष भी बना दिया था। निगम में अनाज के परिवहन की दरों को लेकर धुर्वे पर आरोप लगा था कि उन्होंने जानबूझकर परिवहन ठेके संबंधी फाइल अपने पास रखी, ताकि नए ठेकेदार के बजाय पुराना ठेकेदार ही परिवहन का काम कर सके। नए ठेकेदार ने परिवहन की दरें कम थीं। जिससे निगम को लाखों रुपए का नुक्सान हुआ। धुर्वे के मामले में जिस तरह लोकायुक्त संगठन ने रूचि ली वह चौंकाने वाली है। जिस लोकायुक्त संगठन में मंत्रियेां के खिलाफ वर्षों से जांच लंबित है, वहां ओमप्रकाश धुर्वें के मामले में प्रारंभिक जांच करने के बाद 4 मई 2006 को उनके खिलाफ प्रकरण कायम किया गया और 10 जनवरी 2007 को कोर्ट में उनके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया।
धुर्वें से मांगे थे पांच लाख : ओमप्रकाश धुर्वें ने भोपाल के श्यामला हिल्स थाने में लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि तत्कालीन लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल के बेटे के पीए के नाम से एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन करके उक्त मामले को निबटाने के लिए पांच लाख रुपए मांगे थे। लेकिन उन्होंने यह राशि नहीं दी। यद्यपि पुलिस ने धुर्वें की शिकायत को जांच के बाद खारिज कर दिया था।
मुख्यमंत्री पर कार्यवाही नहीं : लोकायुक्त संगठन में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनकी पत्नी साधना सिंह के खिलाफ 15 नवम्बर 2007 को भोपाल जिला न्यायालय के आदेश पर प्रकरण कायम किया गया था। लगभग ढाई साल बाद भी अभी तक इस प्रकरण में मुख्यमंत्री अथवा उनकी पत्नी को बयान देने के लिए भी लोकायुक्त संगठन नहीं बुलाया गया है। बताया जाता है कि नए लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद संगठन के एक अधिकारी ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री एवं उनकी पत्नी के बयान दर्ज करने की औपचारिकता पूरी कर ली है तथा शीघ्र ही मुख्यमंत्री को इस मामले में क्लीन चिट देने की तैयारी है।
प्रहलाद को लिया साथ : मुख्यमंत्री ने रूठे अपने पुराने मित्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को मुख्यमंत्री भाजपा में शामिल करके डम्पर प्रकरण को ठंडा कर लिया है। भाजपा में शामिल होने से पहले प्रहलाद पटेल ने ही सबसे पहले यह मामला उठाया था।
अहसान में मिली कुर्सी : लोकायुक्त संगठन में मुख्यमंत्री की जांच को ढाई साल तक दबाकर रखने वाले लोकायुक्त संगठन भोपाल के पुलिस अधीक्षक केके लोहानी को भोपाल का उप पुलिस महानिरीक्षक का पद देकर उपकृत किया गया है।
: कब से लंबित है जांच :
मंत्री- शिकायत दिनांक - एवं आरोप
1 - शिवराज सिंह चौहान 15 नवम्बर 07 डम्पर कांड
2 - शिवराज सिंह चौहान 29 अप्रेल 08 दवा खरीदी में घोटाला
अजय विश्रोई
3 - बाबूलाल गौर 30 जून 07 खनिज लीज घोटाला
लक्ष्मीकांत शर्मा
4 - लक्ष्मीकांत शर्मा 25 जुलाई 05 खनिज लीज घोटाला
5 - जयंत मलैया 31 मार्च 08 बिल्डर को 20 करोड़ का लाभ पहुंचाया
6 - जयंत मलैया 2 मई 08 श्रीराम बिल्डर को अवैध लाभ पहुंचाया
7 - जयंत मलैया 19 मार्च 07 पद का दुरूपयोग
8 - जयंत मलैया 9 जून 08 पद का दुरूपयोग
9 - अजय विश्रोई 23 जुलाई 07 नर्सिंग कॉलेज में पद का दुरूपयोग
जयंत मलैया
10 - हिम्मत कोठारी 14 मई 07 मोरों के दाना पानी में घपला
11 - चौधरी चन्द्र भान सिंह 25 जनवरी 08 पद का दुरूपयोग कर सम्पत्ति एकत्रित करना
12 - कमल पटेल 26 नवम्बर 07 भू माफिया को 25 करोड़ का लाभ पहुंचाया
13 - कैलाश विजयवर्गीय 20 जून 07 ट्यूबवेल खनन में पद का दुरूपयोग
14 - कैलाश विजयवर्गीय 10 अप्रेल 07 बीओटी स्कीम में पद का दुरूपयोग
15 - अनूप मिश्रा 3 अप्रेल 07 जल संसाधन में ठेकेदारों को अनुचित लाभ
16 - मोती कश्यप 4 जून 05 मछली ठेकेदारों को पांच करोड़ का लाभ
इनके खिलाफ हुआ चालन पेश
17 - जुगल किशोर बागरी 29 सितम्बर 1998 शिक्षाकर्मी की भर्ती में घपला
18 - ओम प्रकाश धुर्वे 4 मई 06 अनाज परिवहन में ठेकेदार को लाभ पहुंचाया
दलित व आदिवासी नेताओं पर होती है कार्यवाही
प्रभावशाली बच जाते हैं
रवीन्द्र जैन
भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले छह वर्षों का लोकायुक्त संगठन का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। इस कार्यकाल में लोकायुक्त ने प्रदेश के जिन दो मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों के खिलाफ चालान पेश किया उनमें एक आदिवासी तथा एक दलित वर्ग का है। जबकि राज्य के कई प्रभावशाली मंत्रियों के खिलाफ जितनी भी शिकायतें लोकायुक्त संगठन में की गईं उन्हें या तो जांच के नाम से लंबित रखा गया अथवा क्लीन चिट दे दी गई है।
लोकायुक्त संगठन ने सूचना के अधिकार के तहत 10 जुलाई 2007 को बताया था कि लोकायुक्त संगठन में प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित 13 मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। इनमें से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जुगलकिशोर बागरी एवं ओमप्रकाश धुर्वे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत आपराधिक प्रकरण कायम किया गया है। जबकि अजय विश्रोई, बाबूलाल गौर, लक्ष्मीकांत शर्मा, जयंत मलैया, हिम्मत कोठारी, चौधरी चन्द्रभान सिंह, कमल पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, अनूप मिश्रा, मोती कश्यप के खिलाफ शिकायतों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त संगठन ने दलित गर्व के जुगल किशोर बागरी को रीवा में शिक्षाकर्मी चयन समिति के सदस्य के रूप में गलत नियुक्तियों का आरोप लगाकर उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। चालान पेश होने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बागीरी से त्यागपत्र मांग लिया।
ओमप्रकाश धुर्वे : इसी प्रकार ओमप्रकाश धुर्वें जब प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री थे तब राज्य सरकार ने उन्हें मप्र नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष भी बना दिया था। निगम में अनाज के परिवहन की दरों को लेकर धुर्वे पर आरोप लगा था कि उन्होंने जानबूझकर परिवहन ठेके संबंधी फाइल अपने पास रखी, ताकि नए ठेकेदार के बजाय पुराना ठेकेदार ही परिवहन का काम कर सके। नए ठेकेदार ने परिवहन की दरें कम थीं। जिससे निगम को लाखों रुपए का नुक्सान हुआ। धुर्वे के मामले में जिस तरह लोकायुक्त संगठन ने रूचि ली वह चौंकाने वाली है। जिस लोकायुक्त संगठन में मंत्रियेां के खिलाफ वर्षों से जांच लंबित है, वहां ओमप्रकाश धुर्वें के मामले में प्रारंभिक जांच करने के बाद 4 मई 2006 को उनके खिलाफ प्रकरण कायम किया गया और 10 जनवरी 2007 को कोर्ट में उनके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया।
धुर्वें से मांगे थे पांच लाख : ओमप्रकाश धुर्वें ने भोपाल के श्यामला हिल्स थाने में लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि तत्कालीन लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल के बेटे के पीए के नाम से एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन करके उक्त मामले को निबटाने के लिए पांच लाख रुपए मांगे थे। लेकिन उन्होंने यह राशि नहीं दी। यद्यपि पुलिस ने धुर्वें की शिकायत को जांच के बाद खारिज कर दिया था।
मुख्यमंत्री पर कार्यवाही नहीं : लोकायुक्त संगठन में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनकी पत्नी साधना सिंह के खिलाफ 15 नवम्बर 2007 को भोपाल जिला न्यायालय के आदेश पर प्रकरण कायम किया गया था। लगभग ढाई साल बाद भी अभी तक इस प्रकरण में मुख्यमंत्री अथवा उनकी पत्नी को बयान देने के लिए भी लोकायुक्त संगठन नहीं बुलाया गया है। बताया जाता है कि नए लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद संगठन के एक अधिकारी ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री एवं उनकी पत्नी के बयान दर्ज करने की औपचारिकता पूरी कर ली है तथा शीघ्र ही मुख्यमंत्री को इस मामले में क्लीन चिट देने की तैयारी है।
प्रहलाद को लिया साथ : मुख्यमंत्री ने रूठे अपने पुराने मित्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को मुख्यमंत्री भाजपा में शामिल करके डम्पर प्रकरण को ठंडा कर लिया है। भाजपा में शामिल होने से पहले प्रहलाद पटेल ने ही सबसे पहले यह मामला उठाया था।
अहसान में मिली कुर्सी : लोकायुक्त संगठन में मुख्यमंत्री की जांच को ढाई साल तक दबाकर रखने वाले लोकायुक्त संगठन भोपाल के पुलिस अधीक्षक केके लोहानी को भोपाल का उप पुलिस महानिरीक्षक का पद देकर उपकृत किया गया है।
: कब से लंबित है जांच :
मंत्री- शिकायत दिनांक - एवं आरोप
1 - शिवराज सिंह चौहान 15 नवम्बर 07 डम्पर कांड
2 - शिवराज सिंह चौहान 29 अप्रेल 08 दवा खरीदी में घोटाला
अजय विश्रोई
3 - बाबूलाल गौर 30 जून 07 खनिज लीज घोटाला
लक्ष्मीकांत शर्मा
4 - लक्ष्मीकांत शर्मा 25 जुलाई 05 खनिज लीज घोटाला
5 - जयंत मलैया 31 मार्च 08 बिल्डर को 20 करोड़ का लाभ पहुंचाया
6 - जयंत मलैया 2 मई 08 श्रीराम बिल्डर को अवैध लाभ पहुंचाया
7 - जयंत मलैया 19 मार्च 07 पद का दुरूपयोग
8 - जयंत मलैया 9 जून 08 पद का दुरूपयोग
9 - अजय विश्रोई 23 जुलाई 07 नर्सिंग कॉलेज में पद का दुरूपयोग
जयंत मलैया
10 - हिम्मत कोठारी 14 मई 07 मोरों के दाना पानी में घपला
11 - चौधरी चन्द्र भान सिंह 25 जनवरी 08 पद का दुरूपयोग कर सम्पत्ति एकत्रित करना
12 - कमल पटेल 26 नवम्बर 07 भू माफिया को 25 करोड़ का लाभ पहुंचाया
13 - कैलाश विजयवर्गीय 20 जून 07 ट्यूबवेल खनन में पद का दुरूपयोग
14 - कैलाश विजयवर्गीय 10 अप्रेल 07 बीओटी स्कीम में पद का दुरूपयोग
15 - अनूप मिश्रा 3 अप्रेल 07 जल संसाधन में ठेकेदारों को अनुचित लाभ
16 - मोती कश्यप 4 जून 05 मछली ठेकेदारों को पांच करोड़ का लाभ
इनके खिलाफ हुआ चालन पेश
17 - जुगल किशोर बागरी 29 सितम्बर 1998 शिक्षाकर्मी की भर्ती में घपला
18 - ओम प्रकाश धुर्वे 4 मई 06 अनाज परिवहन में ठेकेदार को लाभ पहुंचाया
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